सोचता था की

सोचता था की
सितारो के नज़ारे शहर मे ना होंगे
नहीं जनता था की
शहर के लोग ही सितारो के जैसे होंगे
यह सच है की
देश को चलाने वाले गाँव से होते है
गाँव खाली होने की
वजह आजीब है दोस्तो
गाँव छोड़ के गये वो हाल लेने ना आये
जो रह गये वो बेचारे हो गये

सच कहा है किसी ने
नये आशियानों को बेताब आदमी
अक्सर पुराने आफ्नो को भूल जाते है
पारायों से क्या सिकवा करे
अपना किसे कहे भाई
पहले समजधार थे फिर बाहुबली हुये
फिर पैसेवाले हुये फिर गुंडे और अब
व्यापारी ईस्ट इंडिया कंपनी की
तरह राजनेता हो चले है

कौन कहता है की
अमीर हो रहे है हिन्द वाले
कौन कहता है की
सोने की चिड़िया फिर से सोने की हुई है
अरे अमीर तो पहले के सेठ लोग थे
जिनकी धरमशालाओ मे लोग आज भी रुकते है
जिनके बनाये तालाबो मे लोग आज भी नहाते है
आज के पैसे वाले तो बोतलों मे पानी भरते है
खेलो को स्पोन्सर करते है
और किसानो पर महगाई धरते है